Sunday, May 31, 2020

चाणक्य नीति मूल ग्रन्थ - संस्कृत व हिंदी में

णक्य (अनुमानतः ईसापूर्व 376 – ईसापूर्व 283) चन्द्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे। वे ‘कौटिल्य’ नाम से भी विख्यात हैं। वे तक्षशिला विश्वविद्यालय के आचार्य थे। उन्होंने नंदवंश का नाश करके चन्द्रगुप्त मौर्य को राजा बनाया। उनके द्वारा रचित अर्थशास्त्र नामक ग्रन्थ राजनीति, अर्थनीति, कृषि, समाजनीति आदि का महान ग्रंन्थ है। अर्थशास्त्र मौर्यकालीन भारतीय समाज का दर्पण माना जाता है।


चाणक्य तक्षशिला (एक नगर जो रावलपिंडी के पास था) के निवासी थे। इनके जीवन की घटनाओं का विशेष संबंध मौर्य चंद्रगुप्त की राज्यप्राप्ति से है। ये उस समय के एक प्रसिद्ध विद्वान थे, इसमें कोई संदेह नहीं। कहते हैं कि चाणक्य राजसी ठाट-बाट से दूर एक छोटी सी कुटिया में रहते थे। चाणक्य के नाम पर डॉ चंद्रप्रकाश द्विवेदी द्वारा लिखित और निर्देशित ४७ भागों वाला एक धारावाहिक भी बना था जिसे मूल रूप से 8 सितंबर 1991 से  9 अगस्त 1992 तक डीडी नेशनल पर प्रसारित किया गया था।

https://youtu.be/kcJv8cyAwlI

Tuesday, March 24, 2020

भारतीय नववर्ष की शुभकामनाएं

“हिन्दू नववर्ष” चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रमी संवत् 2077 (तदानुसार 25 मार्च 2020) की आप सभी को अग्रिम शुभकामनाएँ।*

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, आज मार्च माह का चौथा सप्ताह चल रहा है, वहीं, हिन्दू कैलेंडर के चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष का प्रारंभ होगा। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा यानी पहली तिथि से हिन्दू नववर्ष 2077 का प्रारंभ हो जाएगा।

24 मार्च: दिन— मंगलवार: चैत्र अमावस्या। विक्रम संवत 2076 का अंतिम दिन।

चैत्र अमावस्या:  मंगलवार को चैत्र मास की अमावस्या है। अमावस्या के साथ ही विक्रम संवत 2076 का समापन भी हो जाएगा।

25 मार्च: दिन— बुधवार: चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ। कलश स्थापना। गुड़ी पड़वा। विक्रम संवत 2077 प्रारंभ। 

चैत्र नवरात्रि प्रारंभ: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ होगा। 

हिन्दू नववर्ष 2077: चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से ही हिन्दू नववर्ष का प्रारंभ होता है। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत 2077 यानी हिन्दू नववर्ष 2077 का प्रारंभ हो जाएगा। 

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा का ऐतिहासिक महत्व :

1. इसी दिन आज से तथा सृष्टि संवत 1,96,08,53,121 वर्ष पूर्व सूर्योदय के साथ ईश्वर ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की।

2. सम्राट विक्रमादित्य ने इसी दिन राज्य स्थापित किया। इन्हीं के नाम पर विक्रमी संवत् का पहला दिन प्रारंभ होता है।

3. प्रभु श्री राम के राज्याभिषेक का दिन यही है।

4. 144 वर्ष पूर्व स्वामी दयानंद सरस्वती जी ने इसी दिन को आर्य समाज की स्थापना दिवस के रूप में चुना। आर्य समाज वेद प्रचार का महान कार्य करने वाला एकमात्र संगठन है।

5. विक्रमादित्य की भांति शालिवाहन ने हूणों को परास्त कर दक्षिण भारत में श्रेष्ठतम राज्य स्थापित करने हेतु यही दिन चुना।

6. युधिष्ठिर का राज्यभिषेक भी इसी दिन हुआ।


हिन्दू नववर्ष” का प्राकृतिक महत्व :-“

1. वसंत ऋतु का आरंभ वर्ष प्रतिपदा से ही होता है जो उल्लास, उमंग, खुशी तथा चारों तरफ पुष्पों की सुगंधि से भरी होती है।

2. फसल पकने का प्रारंभ यानि किसान की मेहनत का फल मिलने का भी यही समय होता है।

” हिन्दू नववर्ष” कैसे मनाएँ :-

1. हम परस्पर एक दूसरे को नववर्ष की शुभकामनाएँ दें।
2.‌ आपने परिचित मित्रों, रिश्तेदारों को नववर्ष के शुभ संदेश भेजें।
3 . इस मांगलिक अवसर पर अपने-अपने घरों पर भगवा पताका फैहराएँ। एवं‌ वेद आदि शास्त्रो के स्वाध्याय का संकल्प ले।
4. घरों में हवन यज्ञ (सामग्री मे लोबान एवं गंधक का उपयोग)आयोजन अवश्य करें ।

शुभ संयोग 2077

 इस बार अंग्रेजी के नए साल 2020 की शुरुआत और 25 मार्च 2020 से शुरू होने वाला भारतीय नवसंवत्सर विक्रम संवत 2077 दोनों ही बुधवार के दिन से होगी।

ज्योतिष के अनुसार नये साल 2020 में पूरे वर्ष पर बुधदेव का अधिपत्य रहेगा। मंत्रिमंडल में इस बार राजा बुध और मंत्री चंद्रमा रहेंगे।

साल 2020 में मंत्रिमंडल के राजा बुध कन्या राशि का स्वामी है। अंग्रेजी नव वर्ष का शुभारंभ कन्या लग्न में ही होगा।

अंक ज्योतिष के अनुसार अंग्रेजी नव वर्ष 1/1/2020 का कुल योग भी 6 है। वर्ष 2020 में बुध के राजा होने से पूरे वर्ष धर्म और अध्यात्म का बोलबाला रहने वाला है।

इस बार नया साल 2020 का आगमन रवि और सिद्धि योग में होने से वर्ष 2020 शुभ रहेगा।

25 मार्च 2020 को विक्रम नवसंवत्सर 2077 का शुभारंभ बुधवार को होगा। बुध का संबंध उन्नति और संपन्नता से होता है।

इससे पहले बुधवार के दिन नए वर्ष का शुभारंभ 2014 में भी हुआ। जो इस बार फिर से 2020 में ऐसा संयोग बन रहा है। 

कन्या लग्न में साल शुरू होने से इस राशि के लोगों के लिए यह साल बेहतरीन बीतेगा। साल 2020 पर बुध का अधिपत्य रहने से खासतौर पर महिलाओं के लिए शुभ साल रहेगा।

विशेष:- कोरोना के चलते ज़्यादा घबराने की आवश्यकता नहीं है बस सतर्क रहने की आवश्यकता है … आज की परिस्थिति देखकर एक वृतांत याद आया, महाभारत युद्ध में अपने पिता द्रोणाचार्य के धोखे से मारे जाने पर अश्वत्थामा बहुत क्रोधित हो गये
उन्होंने पांडव सेना पर एक बहुत ही भयानक अस्त्र “नारायण अस्त्र” छोड़ दिया।

इसका कोई भी प्रतिकार नहीं कर सकता था।यह जिन लोगों के हाथ में हथियार हो और लड़ने के लिए कोशिश करता दिखे उस पर अग्नि बरसाता था और तुरंत नष्ट कर देता था।

भगवान श्रीकृष्ण जी ने सेना को अपने अपने अस्त्र शस्त्र छोड़ कर, चुपचाप हाथ जोड़कर खड़े रहने का आदेश दिया। और कहा मन में युद्ध करने का विचार भी न लाएं, यह उन्हें भी पहचान कर नष्ट कर देता है।

नारायण अस्त्र धीरे धीरे अपना समय समाप्त होने पर शांत हो गया।
इस तरह पांडव सेना की रक्षा हो गयी।
इस कथा प्रसंग का औचित्य समझें?
हर जगह लड़ाई सफल नहीं होती।प्रकृति के प्रकोप से बचने के लिए हमें भी कुछ समय के लिए सारे काम छोड़ कर, चुपचाप हाथ जोड़कर, मन में सुविचार रख कर एक जगह ठहर जाना चाहिए। तभी हम इसके कहर से बचे रह पाएंगे।

कोरोना भी अपनी समयावधि पूरी करके शांत हो जाएगा।

आप सभी से विनम्र निवेदन है कि “हिन्दू नववर्ष” हर्षोउल्लास के साथ मनाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सज्जनों को प्रेरित करें।

हिंदु नववर्ष 2077 की आप सभी बंधुओं को पुन: अग्रिम शुभकामनाएँ ।

Monday, March 23, 2020

नारद संहिता में वर्णित है करोना की स्टीक भविष्यवाणी


वर्तमान में पूरे विश्व को भयभीत करने वाली करोना महामारी की भविष्यवाणी आज से लगभग 10 हजार वर्ष पूर्व नारद संहिता में कर दी गई थी यह भी उसी समय बता दिया गया था कि यह महामारी किस दिशा से फैलेगी।


भूपाव हो महारोगो मध्य स्यार्धवृष्टय ।
दुखिनो जंत्व सर्वे वत्स रे परीधाविनी ।।
अर्थात परीधावी नामक संवत्सर में राजाओं में परस्पर युद्ध होगा और महामारी फैलेगी बारिश भी असामान्य होगी व सभी प्राणी दुखी होंगे ।
इस महामारी का प्रारम्भ 2019 के अंत में पड़ने वाले सूर्यग्रहण से होगा ! जिसका बृहत संहिता में वर्णन भी आया है……..
शनिश्चर भूमिप्तो स्कृद रोगे प्रीपिडिते जनाः
अर्थात जिस वर्ष के राजा #शनि होते हैं उस वर्ष में महामारी फैलती है।
विशिष्ट संहिता में वर्णन प्राप्त हुआ है कि जिस दिन इस रोग का प्रारम्भ होगा उस दिन पूर्वा भाद्र नक्षत्र होगा ।
यह 100% सत्य है कि 26 दिसंबर 2019 को पूर्वाभाद्र नक्षत्र था औऱ उसी दिन से महामारी का प्रारंभ हो गया था, क्योंकि…. चीन  से इसी समय यह महामारी जिसका की पूर्व दिशा से फैलने का संकेत नारद संहिता में पहले से ही दे रखा था, शुरू हुई थी ।
महामारी का अंत………
विशिष्ट संहिता  के अनुसार इस महामारी का प्रभाव 3 से 7 महीने तक रहेगा ! परंतु नव संवत्सर 2078 के प्रारम्भ से इसका प्रभाव कम होना शुरू हो जाएगा अर्थात भारतीय नव संवत्सर जिसका नाम प्रमादी संवत्सर है जो कि 25 मार्च से प्रारंभ हो रहा है इसी दिन से करोना का प्रभाव कम होना प्रारम्भ हो जाएगा ।
हमारे धर्मशास्त्रों  में सृष्टि के प्रारम्भ से लेकर अंत तक की प्रत्येक भविष्यवाणी की गई है परन्तु हम भारतीय आज भी पाश्चात्य संस्कृति का अनुकरण कर रहे हैं। आओ पुनः लौटें अपनी संस्कृति की औऱ…..
साभार

Saturday, March 21, 2020

कोरोना वॉयरस और रक्तबीज वॉयरस

कोरोनावायरस (Coronavirus) कई वायरस (विषाणु या दैत्यों) प्रकारों का एक समूह है जो स्तनधारियों और पक्षियों में रोग के कारक होते हैं। लातिनी भाषा में "कोरोना" का अर्थ "मुकुट" होता है और इस वायरस के कणों के इर्द-गिर्द उभरे हुए कांटे जैसे ढाँचों से इलेक्ट्रान सूक्षमदर्शी में मुकुट जैसा आकार दिखता है, जिस पर इसका नाम रखा गया था।

यह वायरस भी जानवरों से आया है। ज्यादातर लोग जो चीन शहर के केंद्र में स्थित हुआनन सीफ़ूड होलसेल मार्केट में खरीदारी के लिए आते हैं या फिर अक्सर काम करने वाले लोग जो जीवित या नव वध किए गए जानवरों को बेचते थे जो इस वायरस से संक्रमित थे।

2019–20 का कोरोना वायरस प्रकोप

 (21 मार्च 2020 तक):

██ 1000+ पुष्टीकृत मामले

██ 100–999 पुष्टीकृत मामले

██ 10–99 पुष्टीकृत मामले

██ 1–9 पुष्टीकृत मामले



कोरोनावायरस से होने वाली मृत्यु के पुष्टीकृत मामले (21 मार्च 2020 तक):██ देश जहाँ पुष्टीकृत मामले सामने आए हैं, और कम से कम चार मृत्यु हुई है।

यह लेख वर्तमान में उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर 2019–20 के कोरोना वायरस प्रकोप से प्रभावित देशों और क्षेत्रों को दर्शाता है। सबसे पहले यह वायरस वुहानचीन में पाया गया, और वहाँ से अन्य क्षेत्रों में फैल गया। चूँकि यह लेख केवल उन स्त्रोतों का उल्लेख करता है जो वर्तमान में उपलब्ध हैं, इसमें सभी समकालीन प्रमुख प्रतिक्रियाएं और उपाय शामिल नहीं की जा सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने १२ मार्च, २०२० को इसे महामारी घोषित कर दिया।

इस कोरोना के समान ही इतिहास में एक और वायरस पृथिवी पर वायरल हुआ था । उसने भी कोरोना के समान ही रौद्र रूप धारण कर लिया था। वह था दानव वॉयरस - रक्तबीज वॉयरस। जो एक वॉयरस (दैत्य) से दूसरा वॉयरस (दैत्य) निकलता है। 

दानव रक्तबीज असीम शक्तिशाली था। रणभूमि में वह अपनी असुर सेना के साथ भगवती जगदम्बा के सामने पहुंचा और अपने तीखे बाणों से देवी पर चोट करना आरंभ कर दिया। तब कालिका देवी हाथ में त्रिशूल, गदा और शक्ति लेकर दानवों को मारते हुए विचरने लगी और सैंकड़ों दानव काल का ग्रास बनने लगे।

देवी शिवदूती के अट्टहास से ही दैत्य धरती पर पड़ जाते थे। 'चामुण्डा' और 'कालिका' उन्हें बड़ी उतावली के साथ खाने में जुट जाती थी। रक्तबीज ने सुना-दानवों में भयंकर चीत्कार मचा है और देवता बार-बार जय के नारे लगा रहे हैं। वह महान बली और तेजस्वी दैत्य था। क्रोध के कारण उसकी आंखें लाल हो रही थी।

वह देवी के सामने आ पहुंचा। उस दानव के शरीर से रक्त की बूंद जब भूमि पर गिरती थी तब उस बूंद से तुरंत दानव उत्पन्न हो जाते थे। उनके रूप और पराक्रम में बिलकुल समानता रहती थी। भगवान शंकर ने उसे यह बहुत ही अद्भुत वर दे दिया था कि तुम्हारे रक्त से असंख्य महान पराक्रमी दानव उत्पन्न हो जाएंगे।

वैष्णवी देवी ने दैत्यराज रक्तबीज को चक्र से चोट पहुंचाई। चक्र से छिद जाने के कारण उसके शरीर से रक्त की धारा बह चली। उस समय जहां-जहां भी रक्तबीज के शरीर से निकल कर रक्त की बूंदें भूमि पर गिरती थी, वहीं-वहीं रक्तबीज के समान ही हजारों राक्षस उत्पन्न हो जाते थे।

ऐन्द्री ने उस भयंकर दैत्य रक्तबीज को वज्र से मारा। उससे भी रक्त की बूदें बह चली और उसके रक्त से असंख्य रक्तबीज उत्पन्न हो गए। अब रक्तबीज ने भी क्रोधित होकर अपने पैने बाणों से देवियों को मारना शुरू कर दिया। चण्डिका अपने तीखे तीरों से उसे सब ओर से मारने लगी। अब रक्तबीज के शरीर से रूधिर की मोटी धार बह चली। उससे दानव के समान ही असंख्य शूरवीर उत्पन्न हो गए। अब अनगिनत रक्तबीजों ने देवी पर प्रहार करना आरंभ कर दिया।

यह देखकर देवता भयभीत हो गए। इस प्रकार देवता जब भय से घबराकर अत्यन्त चिन्तित हो गए, तब भगवती जगदम्बा ने काली से कहा 'चामुण्डे!' तुम अपना मुख फैलाकर मेरे शस्त्रघात के द्वारा रक्तबीज के शरीर से निकले हुए रूधिर को पीती जाओ। तुम ऐसे ढंग से इस दानव का रूधिर पीती रहो कि अब खून की भी बूंद धरती पर न गिरने पाए। इस प्रकार दूसरे दानव उत्पन्न नहीं हो सकेंगे।


जगदम्बा ने तलवार और मूसल से रक्तबीज को मारना आरंभ किया और भूखी चण्डिका उसके शरीर के अंगों को खाने लगी। उस दैत्य के रक्त से उत्पन्न अन्य जितने भी महाबली क्रूर रक्तबीज थे, वे सभी गिरते गए और काली उन सबका रूधिर पीने लगी। इस तरह सारे कृत्रिम रक्तबीज तुरंत ही चण्डिका देवी का कलेवा बन गए। जो असली रक्तबीज था, वह भी भयानक चोट खाकर गिर पड़ा। फिर वह उठा और एक हाथ में गदा लेकर देवी को मारने दौड़ा लेकिन देवी ने उसका प्रहार निष्फल कर दिया।

अब यह घायल दैत्य अपने तेज नखों से देवी के सिंह को मारने दौड़ा। उस दैत्य ने वृषभ का रूप धारण कर सिंह को चोट पहुंचाई तब देवी ने उस दैत्य को मारकर धरती को नव जीवन प्रदान किया ।

कोरोना का उपचार :

सूद के अनुसार, मानव कोरोना वायरस आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति से दूसरों में निंम्न तरीको से फैलते हैं:

“हवा से – खांसने और छींकने से व्यक्तिगत संपर्क, जैसे कि हाथ को छूना या हाथ मिलाना।

वायरस संक्रमित वस्तु या सतह को छूना, फिर अपने हाथ धोने से पहले अपने मुंह, नाक या आंखों को छूना ”

“संयुक्त राज्य अमेरिका में, लोग आम तौर पर गिरावट और सर्दियों में आम मानव कोरोना वायरस से संक्रमित होते हैं। हालांकि, संक्रमण वर्ष के किसी भी समय हो सकता है, ”उन्होंने कहा।

उन्होंने कहा, “अधिकांश लोग अपने जीवनकाल में एक या अधिक सामान्य मानव कोरोनवायरस से संक्रमित हो जाएंगे।”

सूद भी SARS और MERS दोनों के प्रकोपों ​​को पशु-से-मानव संपर्क से बताता है, SARS में ऊंटों के संपर्क से चमगादड़ और MERS के संपर्क से सबसे अधिक संभावना है।”चूंकि संक्रमण पैदा करने वाला जीव एक वायरस है, इसलिए आज तक हमारे पास कोई विशिष्ट एंटीवायरल दवाएं नहीं हैं,” सूद ने कहा।

चीनी अधिकारियों ने सांस की बीमारी के प्रकोप की पहचान की है। सीडीसी ने प्रकोप के कारण एक स्तर 3 की चेतावनी जारी की है, यात्रियों को सूचित करते हुए कि वे इस क्षेत्र में गैर-संभावित यात्रा से बचें।

इटली, दक्षिण कोरिया और ईरान में चीन के बाहर अब नए क्लस्टर बन गए हैं।


विशेषज्ञ इस बात पर जोर देते हैं कि चूंकि वायरस बीमारी का कारण है, इसलिए कोई भी उपचार उपलब्ध नहीं है।आज कोरोना पीड़ित 1 व्यक्ति के सम्पर्क में आने से वह व्यक्ति भी संक्रमित होता है । इस तरह एक से 2 ,2 से 30 क्रमशः बढ़ते जाते है। इस कोरोनारूपी दानव को मारने का एक ही तरीका है जो माँ काली ने अपनाया कि रक्त कहीं न गिरे। मतलब हम एक दूसरे से थोड़ी दूरी बनाए रखे सम्पर्क में न आये। भीड़ से बचे , अनावश्यक घर से न निकले। निश्चित ही नवरात्रि की समाप्ति तक माँ जगदम्बा की कृपा से अवश्य ही यह कोरोना वायरस निश्चित रूप से समाप्ति की ओर होगा।शक्ति माता किसी न किसी माध्यम से अवश्य हम सब की रक्षा करेंगी। आज से ही वो समस्त बंधुगण जो ईश्वर पर विश्वास रखते है, दुर्गा कवच का पाठ प्रारम्भ करें।

#ISupportJantaCurfew

#COVID19

#IndiaFightsCorona

#JantaCurfewMarch22

#CoronaUpdatesInIndia

#PMO

#modi

- डॉ. विकास शर्मा

 

कोरोना बचाव व हिन्दू धर्म में सूतक रहस्य

हिन्दू धर्म मे विभिन्न कार्यो में सूतक बताया गया है।

सूतक यानी अलगाव, कुछ दिन अलग रहना।

संतान के जन्म के समय उस घर मे सूतक होता है,
किसी की मृत्यु में घर मे सूतक होता है

अर्थात इन परिवारों के घर कोई नही जा सकता और नाही इनसे कोई मिल सकता था।

क्यो?

क्यंकि
सन्तान के जन्म के बाद बाहरी लोगों से उसके स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है। सन्तान और उसकी माता बीमारी के सबसे आसान शिकार होते है। इसलिए दूसरे के संपर्क से इनको दूर रखा जाता था।

किसी के घर मृत्यु हो जाए तो 3 दिन का सूतक उस घर मे होता है।
घर मे बीमार होकर मरने वाले व्यक्ति या मृत शरीर मे ही नए जीवाणु पनपने लगते है।
इसलिए शव का दाह संस्कार किया जाता है। और इस परिवार को समाज से 3 दिन बिना संपर्क के रहना पड़ता है ताकि मृत व्यक्ति के कारण कोई जीवाणु इनको प्रभावित किया हो तो दूसरों को नही करे।
इस कीटाणु को अस्तित्व को सम्पूर्ण खत्म करने के लिए मृत्यु वाले घर मे तीसरे दिन समस्त कपड़े धोए जाते है, हर सामान साफ किया जाता है और दीवालों पर पुताई की जाती है, गोबर से पुरे घर को लीपा जाता है। ये है सम्पूर्ण सैनिटाइजेशन।

अब शवदाह करके लौटने वाले लोगो को अगर ये जीवाणु लग गया तो? उसके उपाय के लिए घर मे घुसने से पहले नीम पानी से पूरे हाथ पैर धोकर, इस नीम पानी को अपने कपड़ो पर छिड़ककर फिर नहाते थे। ये नीम पानी ही सेनेटाइजर होता है और नहाने से कीटाणु खत्म।
परम्परा ये है कि शवदाह करके फिर तालाब या नदी में नहाकर ही लोग घर लौटते थे। और विशेष बात * जब लोग तालाब में एकसाथ नहाने के लिए किनारे पर एकत्रित होते थे, उसके कुछ देर पहले ही तालाब के आस पास उपस्थित सामान्य लोगो को हटा दिया जाता था। और एकत्रित हुए लोग तालाब के उस तरफ घाट पर नहाते थे जिसका उपयोग सामान्य लोग नही करते। ये था जनता कर्फ्यू

अब बताइये
हिन्दू धर्म ही श्रेष्ठ है या नही।

और
कुछ घटिया लोग हिन्दू धर्म की परम्पराओ को अंधविश्वास कहकर मिशनरी से पैसे लेकर हिन्दू धर्म का विरोध करते रहते है।

मूर्ख कौन ?

गर्व करो अपने धर्म पर, अपनी सभ्यता पर और अपनी परंपराओं पर।
#IndiaFightsCorona #corona

Friday, March 20, 2020

कोरोना वॉयरस Vs. भगवान जगन्नाथ


क्या आपने कभी विचार किया है कि, प्रत्येक वर्ष रथ यात्रा के ठीक पहले भगवान जगन्नाथ स्वयं बीमार पड़ते हैं। उन्हें बुखार एवं सर्दी हो जाती है। बीमारी की इस हालत में उन्हें Quarantine किया जाता है जिसे मंदिर की भाषा में अनासार कहा जाता है। भगवान को 14 दिन तक एकांतवास यानी Isolation में रखा जाता है। आपने ठीक पढ़ा है 14 दिन ही। Isolation की इस अवधि में भगवान के दर्शन बंद रहते हैं एवं भगवान को जड़ीबूटियों का पानी आहार में दिया जाता है यानी Liquid diet और यह परंपरा हजारों साल से चली आ रही है।

अब बीसवीं सदी में पश्चिमी लोग हमें पढ़ा रहे हैं कि Isolation & Quarantine का समय 14 दिन होना चाहिए।

वो हमें ऐसा पढ़ा सकते हैं क्योंकि हम स्वयं सोचते हैं कि हिंदू धर्म अन्धविश्वास से भरा हुआ अवैज्ञानिक धर्म है।

जो आज हमें पढ़ाया जा रहा है हमारे पूर्वज हजारों साल पहले से जानते थे।

गर्व करो अपने धर्म पर, अपनी सभ्यता पर और अपनी परंपराओं पर।

#IndiaFightsCorona #corona

22 मार्च 2020 - जनता कर्फ्यू का वैज्ञानिक व आध्यात्मिक अर्थ - अत्यंत सूझबूझ का परिचायक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 22 मार्च 2020 को घोषित जनता कर्फ्यू, कोरोना वायरस के विरुद्ध एक अत्यंत ही सूझबूझ भरा वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कदम है। आपने इस बारे में समझने की अगर कोशिश की, तो आप इस कदम में 100% प्रतिशत न केवल साथ देंगे बल्कि जब पूरे मन से और पूरे उत्साह से साथ देंगे तो अविश्वसनीय परिणाम सामने आएंगे। आइए इसको समझने की कोशिश करते हैं।

क्या आप जानते है कि कोरोना वायरस की उम्र अलग अलग परिस्थितियों में कितनी होती है। कोरोना वायरस आम लेकिन अलग अलग परिस्थितियों में 3 से 72 घण्टे तक सक्रिय रह सकता है यानि कि उसकी उम्र इतनी ही है, वो भी अधिकतम 72 घण्टे तक, लेकिन ज़्यादातर 36 घण्टे में ये समाप्त हो जाता है। अब अगर सरकार पूरे देश को क्वारंटाइन करना चाहे या आइसोलेशन वार्ड में एडमिट करना चाहे तो क्या ये मुमकिन है, बिल्कुल नही। इसलिए बहुत समझदारी से मोदीजी और उनके सलाहकारों ने रविवार का दिन चुना, जिस दिन सभी देशवासियों को घर पर रोकना आसान है। अब इसे गौर से समझिए। जब हमें 22 तारीख को सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक जनता कर्फ्यू के रूप में घर पर रहने के लिए कहा गया है वो भी रविवार को छुट्टी वाले दिन तो इसका साफ मतलब है कि पूरे देशवासियों को 36 घंटे तक क्वारंटाइन में रहने के लिए एक समझदारी भरे निवेदन से मनाना । क्योंकि हम सब 21 मार्च की शाम या रात से अपने घर आ जाएंगे और पूरी रात घर पर ही रहते हैं जो की जाहिर सी बात ही तो है, फिर अगले दिन सुबह 7 बजे से रात के 9 बजे तक 22 मार्च को जनता कर्फ्यू की वजह से घर पर रहेंगे और फिर उसके बाद फिर घर पर ही सो जाएंगे तो 23 मार्च सुबह जाग कर उठेंगे। इसका मतलब की 21 मार्च की रात से 23 मार्च की सुबह तक जब हम घर पर ही रहेंगे तो 36 घण्टे का हम अपने आप को घर में क्वारंटाइन निवास ही करेंगे। यानी कि कोरोना वायरस अगर कही है तो उसे, 36 घँटे के इस क्वारंटाइन वास या आइसोलेशन वार्ड जैसी स्थिति के चलते पनपने का माध्यम नही मिलेगा और वो लगभग समाप्त होने की स्थिति में पहुंच जायेगा। इस प्रकार से पूरा भारत एक वैज्ञानिक प्रयोग के माध्यम से कोरोना को हरा सकने की सशक्त स्थिति में आ जाएगा।

https://youtu.be/inFlgsjigNM


दूसरी तरफ

हमारे आदरणीय पीएम ने क्यूं कहा .
जरा जाने..
शाम 5 बजे जब 130 करोड़ नागरिक एक साा
5 मिनट के लिए

जब शाम को 5 बजे, जब लोग अपनी खिड़की या दरवाजे पर खड़े होकर 5 मिनट तक थाली या ताली बजाकर उन लोगो को धन्यवाद देंगे तो ये भी एक आध्यात्मिक प्रयोग ही तो है जिसके माध्यम से प्राणाकर्षण करके कोरोना से लड़ने वालो को सशक्त व सम्बल प्रदान किया जाएगा। अंग्रेजी में इसे LAW OF ATTRACTION कहते हैं।

"तालियां ढोल नगाड़े ,थाली कटोरा,घंटी या एक ऐसी " SOUND FREQUENCY " पैदा होगी जिसे "CORONA VIRUS" की मौत होना निश्चित है ।
यह विज्ञान भी मानता है,
और हमारे शास्त्रों में इसका उल्लेख भी है ।
इस virus को मारने का यही एकमात्र इलाज भी है ।


हम भारतीय पूरे विश्व के लिए एक मिसाल कायम करेंगे ।

बस ,
अब हम भारतीयों को अपने परिवार,अपने रिश्तेदार, अपने बच्चों, अपने करीबी दोस्तों , अपने समाज को बचाने के लिए अपना कर्तव्य, अपना फ़र्ज़ निभाना होगा । शाम 5 बजे किसी भी हाल में "sound frequency" को पैदा करना ही एकमात्र विकल्प है ।

तो इस प्रकार श्री नरेंद्र मोदीजी की सरकार अभूतपूर्व सूझबूझ से कोरोना वायरस का जड़मूल से नाश करने का आग्रह कर रही है। इस योजना को समझने और क्रियान्वयन करने की महती आवश्यकता है।

हम सब सावधान रहें और जागरूकता के साथ कदम बढ़ाते हुए इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक योजना को समर्थन देते हुए इसका क्रियान्वयन में दिल से सहयोग दें।


आज हमें एक भारतीय जवान की तरह अपनी लड़ाई "corona virus"
से करने का मौका मिला है , आइए, साथ मिलकर इस पर जीत हासिल करें
जय हिन्द…! 🇮🇳

🙏🏻🙏🏻🌹🙏🏻🙏🏻

Saturday, March 14, 2020

मुगलों को धूल चटाने वाला भारत का हिन्दू सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य


हेमू या हेमचन्द्र विक्रमादित्य उन महान हिन्दू वीरों में है जिन्हें आज़ादी के बाद सरकार की इस्लाम परस्त नीतियों की वज़ह से जानबूझकर इतिहास में बेहद कम स्थान दिया गया क्योंकि कांग्रेस सरकार का एकमात्र उद्देश्य था भारत की संस्कृति को नष्ट करना, इसमें भारत के जीवन दर्शन धर्म का मजाक उड़ाने उन्हें झूठा साबित करने के साथ साथ इस धरती के महान पुरुषों भुला देना भी शामिल था। सम्राट हेमचन्द्र विक्रमादित्य यानी हेमू, इतिहास के भुला दिए गए उन चुनिन्दा महानायकों में शामिल है जिन्होंने इतिहास का रुख पलट कर रख दिया था। हेमू ने बिलकुल अनजान से घर में जन्म लेकर, हिंदुस्तान के तख़्त पर राज़ किया। उसके अपार पराक्रम एवं लगातार अपराजित रहने की वजह से उसे विक्रमादित्य की उपाधि दी गयी।

अक्टूबर 6, 1556 में हेमू ने तरदी बेग खान (मुग़ल) को हारा कर दिल्ली पर विजय हासिल की। हुमायुँ ने जब वापस हमला कर शेर शाह सूरी के भाई को परस्त किया तब हेमू बंगाल में था, कुछ समय बाद हुमायूँ की मृत्यु हो गई। हेमू ने तब दिल्ली की तरफ रुख किया और रास्ते में बंगाल, बिहार उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश की कई रियासतों को फ़तेह किया। आगरा में मुगलों के सेना नायक सिकंदर खान उज्बेग को जब पता चला की हेमू उनकी तरफ आ रहा है तो वह बिना युद्ध किये ही मैदान छोड़ कर भाग गया, इसके बाद हेमू ने 22 युद्ध जीते और दिल्ली सल्तनत का सम्राट बना।

यही हेमू का राज्याभिषेक हुआ और उसे विक्रमादित्य की उपाधि से नवाजा गया। लगभग ३ शताब्दियों के मुस्लिम शासन के बाद पहली बार (कम समय के लिए ही सही) कोई हिन्दू दिल्ली का राजा बना। हेमू ने १५५६ में अपना राज्याभिषेक करके अपना नाम हेमचन्द्र विक्रमादित्य रखा। हालांकि हेमू सिर्फ १ महिना ही दिल्ली के तख़्त पर रहा परन्तु ११९१ में पृथ्वीराज के पतन के बाद हेमू दिल्ली का पहला हिन्दू शासक बना।

हेमू का जन्म एक ब्राह्मण श्री रायपूरण दास के घर 1501 में अलवर राजस्थान में हुआ, जो उस वक़्त पुरोहित (पूजा पाठ करने वाले) थे, किन्तु बाद में मुगलों के द्वारा पुरोहितों को परेशान करने की वजह से रेवारी (हरियाणा) में आ कर नमक का व्यवसाय करने लगे। हेमू का पारिवारिक पेशा पुरोहिताई का था, परन्तु भारत में इस्लाम के स्थापित होने के बाद मुस्लिम बादशाहों ने हिन्दुओं के धार्मिक आयोज़नों पर रोक लगा दी इससे पुरोहिताई से घर चलाना मुश्किल हो गया था। हेमू धार्मिक प्रवृति के थे और संस्कृत, हिंदी, फारसी, अरबी व गणित के ज्ञाता थे। उन्हें घुड़सवारी का बहुत शौक था और वह कुश्ती में भी माहिर थे। सम्राट हेमू की बहन की शादी भार्गव परिवार में हुई थी जो उस समय के सम्राट शेरशाह सूरी के दरबार में तैनात थे।

हेमू के पिता जब रेवाड़ी आए उस समय हेमू 17 साल के थे। उन्होंने इराक और ईरान से गन पाउडर (बारूद) मंगाकर शेरशाह सूरी की सेना को सप्लाई करना शुरू किया।हेमू ने उसी वक़्त रेवारी में धातु से विभिन्न तरह के हथियार बनाने के काम की नींव राखी, जो आज भी रेवारी में ब्रास, कोंपर, स्टील के बर्तन के आदि बनाने के काम के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है। हेमू ने यहां पर ब्रास से निर्मित तोपें भी बनानी शुरू की थी, जिनकी ढलाई भी यहीं पर होती थी। रेवाड़ी में तोपचीवाड़ा नामक वह स्थान आज भी है। यहां पर तोपची रहा करते थे तथा तोपों की ढलाई हुआ करती थी।

हेमू ने शेरशाह सूरी के सेनाओं को खाना पहुँचाने का काम हाथ में लिया, हेमू की कद काठी और योग्यता देख कर शेरशाह ने अपनी सेना में रख लिया जल्दी ही हेमू शेरशाह का सेनापति बन गया, शेरशाह की असमय मृत्यु के बाद दिल्ली की सत्ता हेमू के हाथ में आ गयी। सन 1540 में शेरशाह सूरी ने हुमायुँ को हरा कर काबुल लौट जाने को विवश कर दिया था।

शेर शाह सूरी की 1545 में मृत्यु के बाद इस्लाम शाह ने उसकी गद्दी संभाली, इस्लाम शाह ने हेमू की प्रशासनिक क्षमता को पहचाना और उसे व्यापार एवं वित्त संबधी कार्यो के लिए अपना सलाहकार नियुक्त किया। हेमू ने अपनी योग्यता को सिद्ध किया और इस्लाम शाह का विश्वासपात्र बन गया। इस्लाम शाह हेमू से हर मसले पर राय लेने लगा, हेमू के काम से खुश होकर उसे सेना में खुफिया विभाग का प्रमुख बना दिया गया।

1545 में शेरशाह सूरी की मृत्यु हो गई और उसका पुत्र इस्लाम शाह उत्तर भारत का शासक बना। लेकिन तबीयत खराब होने की वजह से इस्लाम शाह 1550 में दिल्ली से ग्वालियर चला गया और उसने हेमू को पंजाब का गवर्नर बना दिया। अपनी लगन और मेहनत से 1553 तक हेमू सूरी सल्तनत की सेना का मुख्य सेनापति व प्रधानमंत्री बन गया। कुल मिला कर पूरी तरह अफगानी सेना का नेतृत्व हेमू के हाथ में आ गया था। हेमू का सेना के भीतर जम के विरोध भी हुआ पर हेमू अपने सारे प्रतिद्वंदियो को एक एक कर हराता चला गया। उस समय तक हेमू की अफगान सैनिक जिनमे से अधिकतर का जन्म भारत में ही हुआ था। अपने आप को भारत का रहवासी मानने लग गए थे और वे मुग़ल शासकों को विदेशी मानते थे, इसी वजह से हेमू हिन्दू एवं अफगान दोनों में काफी लोकप्रिय हो गया था। 23 जुलाई 1555 को मुगल सम्राट हूमायूं की मृत्यु हो गई। उस समय हेमू बंगाल में था। हूमायूं की मृत्यु के बाद उसने संकल्वप लिया कि वह मुगलों को परास्त कर एक बार फिर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना कर सकता है। इसलिए हेमू ने अपनी सेना के साथ बिहार होते हुए दिल्ली की और कूच कर दिया। इस दौरान हेमू ने 22 लड़ाईयां लड़ीं और मुगलों को खदेड़कर दिल्ली पर कब्जा कर लिया। 7 अक्टूबर 1556 को दिल्ली के पुराने किले में हेमू का राज्याभिषेक हुआ और वह हेमू से सम्राट हेमचंद विक्रमादित्य बन गए।

हेमू ने लगातार २२ युध्दों में मुगलों को धूल चटाकर एक के बाद एक जीत हासिल की। जब हेमू अपनी सेना के साथ निकलता था मुसलमान सरदार अपने किले छोड़कर भाग जाया करते थे, यहाँ तक की जब अकबर ने हेमू पर हमला करने की योजना बना रहा था तो उसके दरबारियों ने उसे समझाया था कि हेमू से मुकाबला करना आसान नहीं होगा।

१५५६ में पानीपत के दूसरे युद्ध में अकबर की सेना युद्ध हार चुकी थी और स्वयं अकबर बैरम खान के साथ भागने की तैयारी में था लेकिन दुर्भाग्य से हवा में छोड़ा गया एक तीर हेमू की आँख में लग गया। आँख में तीर लगा होने के बावजूद हेमू पूरी बहादुरी से अकबर सेना से लड़ता रहा और बेहोश होकर गिर गया। इससे हेमू की सेना में भगदड़ मच गयी मौके का फायदा उठा कर भारत के तथा कथित महान राजा अकबर ने उसकी बेहोशी की हालत में ही उसकी हत्या करके उसकी खाल में भूसा भरवा कर प्रदर्शनी के लिए दिल्ली के महल के दरवाज़े पर रखा। इसी अकबर को इस देश के गुलाम इतिहासकार अकबर महान कहकर बुलाते हैं। इसके बाद दिल्ली तब तक मुगलों के कब्जे में रही जब तक मराठा शक्ति का उदय नहीं हुआ ।

आज कई लोग इतिहास के इस महान नायक को भुला चुके है, किन्तु मुगलों को कड़ी टक्कर देने की वजह से ही हिंदुस्तान कई विदेशी आक्रमणों से बचा रहा। आज भी हेमू की हवेली जर्जर हालत में रेवारी में है। जिस महानायक ने भारत में मुगलों की सत्ता का विनाश कर हिन्दू साम्राज्य की नींव दोबारा रखी आज उस महानायक के बारे में न स्कूलों में पढ़ाया जाता है न मीडिया में कोई चर्चा होती है।
#पृथ्वीराजसनातन

चीन और कोरोना वायरस एवम भारत की वैदिक यज्ञ परंपरा

*कोरोना वायरस के कारणों पर शोध से चीन ने जो निष्कर्ष निकाले हैं वे परोक्ष रूप में भारतीय वैदिक संस्कृति का अनुमोदन करते हैं। जो कि इस प्रकार है:-*


💐 *हमारे प्राचीन ऋषियों ने वेदों के आधार पर शवों को अग्नि में जलाकर दाह संस्कार करने का विधान बनाया था।*

*चीन ने घोषणा की है कि अगर शवों को जमीन में गाड़ देंगे, तो उनके शरीर में जो कोरोना वायरस या अन्य वायरस व बैक्टीरिया होते हैं वो जमीन में मिल जाएंगे और ये वायरस और बैक्टीरिया कभी नष्ट नहीं होंगे, बल्कि जमीन में ही फैलेंगे और जल तथा वायु को प्रदुषित करेंगे। शवों को जला देने से आग के जरिये वायरस और बैक्टीरिया सदा सदा के लिए ख़त्म हो जाते हैं।*

*इसीलिए चीन ने घोषणा की है कि जितने भी लोग कोरोना वायरस से पीड़ित होकर मर रहे हैं, उन सभी का अंतिम संस्कार जलाकर ही किया जायेगा।*


💐 *वेद और वैदिक सहित्य में शाकाहार को ही मनुष्य का भोजन कहा गया है। मांसाहार रोगों को बढ़ाने वाला और महापाप की श्रेणी में आता है।जिसका सेवन स्पष्ट रूप में वर्जित है।* 

*मांसाहार कितना खतरनाक होता है , इस बात की जानकारी चीन को ही नहीं सारे विश्व को कोरोना के कारण पता चली है। जिन प्राणियों को माँसाहारी खाते हैं वे कई प्रकार की घातक बीमारीयों से पीड़ित हो सकते हैं तथा उनके सेवन से मनुष्य उन बीमारीयों की चपेट आ सकता है यह बात कारोना वायरस ने सिद्ध कर दिया है। अब पूरे विश्व को शाकाहार को ही अपनाना होगा।*


💐 *हमारे ऋषियों ने यज्ञ को सर्वश्रेष्ठ कर्म कहा है क्योंकि शुद्ध जल और वायु मनुष्य के लिए परम आवश्यक है। अग्नि में डाला गया घी एवं अन्य सामग्री वातावरण में मौजूद वायरस और बैक्टीरिया को भी समाप्त करता है ।*

*चीन अब भारत में अपनाई जाने वाली यज्ञ पद्धति से वायरस मिटाने पर विचार कर रहा है। क्योंकि मांसाहार त्याग कर वायरस से कुछ सीमा तक तो बच सकते हैं लेकिन जो वायरस वायुमंडल में फैल चुके हैं उनको समाप्त करने का उपाय यज्ञ ही है।*


💐 *वैदिक संसकृति में आपसी मेल जोल में शारीरिक स्पर्श जैसे हाथ मिलाना या गले मिलना या चूमना आदि का कोई स्थान नहीं है। एक दुसरे से मिलने पर हाथ जोड़ कर नमस्ते करने का आदेश है। यह नियम हमारे ऋषियों की वैज्ञानिक व स्वास्थ्य की दृष्टि से उच्च कोटि सोच को दर्शाता है। अन्य अभिवादन के ढंग छूत रोग कारक है इसलिए हाथ जोड़कर नमस्ते करना ही स्वास्थ्य के लिए उचित है।*

*आज चीन में लोगों को कोरोना वायरस से बचने के लिए शारीरिक स्पर्श से बचने के निर्देश दिये गये हैं। यह सब निर्देश वैदिक संस्कृति का ही समर्थन करते हैं।जिनको हमने करोड़ों वर्षों से अपनाया हुआ है।* 


*आज चीन शव दाह संस्कार, शाकाहार, यज्ञ विज्ञान और भारतीय संस्कृति को अपना रहा है! वह दिन दूर नहीं जब पूरा विश्व भारतीय वैदिक संस्कृति को अपनाने को मजबूर होगा 🚩*

*भारत में ऋषि- मुनियों ने जो नियम धर्म और परम्पराओं के आधार पर बनाये है वही सर्वश्रेष्ठ हैं और इनको अपनाने से ही हर रोग से बचा जा सकता है।  🚩*

*मित्रों आपसे निवेदन है इस पोस्ट को अधिक से अधिक परिजनों को भेज कर इस सामाजिक दायित्व में भागीदार बने*💐🌸🙏🙏🌸💐

Thursday, March 12, 2020

The BAPS Shri Swaminarayan Temple in London, is the largest Hindu temple outside India.

The BAPS Shri Swaminarayan Temple in London, is the largest Hindu temple outside India. 


It was built by Pramukh Swami, and is made of 2,828 tonnes of Bulgarian limestone & 2,000 tonnes of Italian marble, which was first shipped to India to be carved by a team of 1,526 sculptors. 


Monday, March 9, 2020

जब भारतीय बन्दी अन्दमान पहुंचे

10 मार्च/इतिहास-स्मृति
*
अन्दमान-निकोबार या काले पानी का नाम सुनते ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। यह वह स्थान है, जहाँ भारत के उन वीर स्वतन्त्रता सेनानियों को रखा जाता था, जिन्हें अंग्रेज शासन अपने लिए बहुत खतरनाक समझता था। इसी प्रकार अति गम्भीर अपराध करने वाले खूँखार अपराधियों को भी आजीवन कारावास की सजा भोगने के लिए यहीं भेजा जाता था।

घने जंगलों से आच्छादित इस क्षेत्र में वनपशु खुलेआम घूमते थे। चारों ओर समुद्र था। नदियों और बड़े-बड़े तालाबों में घडि़याल निद्र्वन्द्व विचरण करते थे। वनों में ऐसी जनजातियाँ रहती थीं, जो अपने विषैले तीरों से मानव को देखते ही मार देती थीं। चारों ओर भीषण डंक वाले साँप और बिच्छू घूमते रहते थे। मच्छरों का तो वहाँ मानो अखण्ड साम्राज्य था। ऐसे में कोई बन्दी जेल से भागता भी, तो उसका मरना निश्चित था। इसीलिए 1857 के स्वाधीनता संग्राम के बाद अंग्रेजों ने इस स्थान को जेल के लिए चुना।

अब समस्या थी कि इन जंगलों की सफाई कौन करेगा ? शासन ने बन्दियों से ही यह काम कराने का निर्णय किया और 10 मार्च, 1858 को स्थायी अधीक्षक डा0 जे.पी. वाकर के साथ बन्दियों का पहला दल पानी के जहाज से पोर्ट ब्लेयर आ गया। इन बन्दियों में सभी प्रकार के लोग थे। हत्या, लूट, डकैती जैसे घोर दुष्कर्म करने वाले खूँखार अपराधी तो थे ही; पर देशभक्त क्रान्तिकारी भी थे। ये स्वतन्त्रता सेनानी सुशिक्षित और अच्छे घरों के नवयुवक थे; पर वहाँ तो सबको एक ही लाठी से हाँका जाता था। 

सुबह होते ही सबको कुल्हाड़ी, आरे और फावड़े देकर सफाई में लगा दिया जाता था। दोपहर में रूखा-सूखा भोजन और फिर काम। जून के मध्य तक अनेक बन्दी बीमारी से मर गये। कुछ मौका पाकर भाग भी गये, जो कभी अपने घर नहीं पहुँच सके। 87 बन्दियों को भागने के आरोप में फाँसी दे दी गयी।

प्रारम्भ में राॅस द्वीप के जंगल को साफ किया गया। फिर चाथम और फीनिक्स में बन्दियों के निवास के लिए कच्ची बैरकें बनायी गयीं। पोर्ट मोर्ट में इन बन्दियों के रहने और उनसे खेती कराने की योजना बनायी गयी। 1867 में पहाड़ गाँव में चैकी, अबार्डीन में थाना और वाइपर में जेल बनायी गयी। अपने घर-परिवार और जन्मभूमि से दूर रहने वाले इन बन्दियों की शारीरिक और मानसिक दशा की कल्पना की जा सकती है। फिर भी आजादी के मतवाले बन्दी झुकने को तैयार नहीं थे।

प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में भारतीय युवक इस आश्वासन पर सेना में भर्ती हुए कि युद्ध के बाद भारत को स्वतन्त्र कर दिया जाएगा। दूसरी ओर नेताजी सुभाषचन्द्र बोस भारत से बाहर रहकर आजादी का प्रयास कर रहे थे। आजाद हिन्द फौज के सर्वोच्च सेनापति के रूप में जब 29 दिसम्बर, 1943 को वे अन्दमान आये, तो उनका भव्य स्वागत किया गया। पोर्ट ब्लेयर के ऐतिहासिक जिमखाना मैदान में उनका भाषण हुआ।

15 अगस्त, 1947 को भारत की स्वतन्त्रता के बाद अन्दमान, निकोबार आदि द्वीपों में भी तिरंगा फहराया गया। सब बन्दियों को छोड़ दिया गया। काले पानी के नाम से कुख्यात वह जेल अब स्वतन्त्रता के लिए यातनाएँ सहने और तिल-तिल कर मरने वाले दीवानों का स्मारक है; पर इसके निर्माण में उन अनाम बन्दियों की भूमिका सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, जो 10 मार्च, 1858 को सबसे पहले वहाँ पहुँचे थे।

#हरदिनपावन

Sunday, March 8, 2020

नारी संगठन को समर्पित सरस्वती ताई आप्टे

9 मार्च/पुण्य-तिथि



1925 में हिन्दू संगठन के लिए डा. हेडगेवार ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य प्रारम्भ किया। संघ की शाखा में पुरुष वर्ग के लोग ही आते थे। उन स्वयंसेवक परिवारों की महिलाएँ एवं लड़कियाँ डा. हेडगेवार जी से कहती थीं कि हिन्दू संगठन के लिए नारी वर्ग का भी योगदान लिया जाना चाहिए। 


डा. हेडगेवार भी यह चाहते तो थे; पर शाखा में लड़के एवं लड़कियाँ एक साथ खेलें, यह उन्हें व्यावहारिक नहीं लगता था। इसलिए वे चाहते थे कि यदि कोई महिला आगे बढ़कर नारी वर्ग के लिए अलग संगठन चलाये, तभी ठीक होगा। उनकी इच्छा पूरी हुई और 1936 में श्रीमती लक्ष्मीबाई केलकर (मौसी जी) ने ‘राष्ट्र सेविका समिति’ के नाम से अलग संगठन बनाया। 


इस संगठन की कार्यप्रणाली लगभग संघ जैसी ही थी। आगे चलकर श्रीमती लक्ष्मीबाई केलकर समिति की प्रमुख संचालिका बनीं। 1938 में पहली बार ताई आप्टे की भेंट श्रीमती केलकर से हुई थी। इस भेंट में दोनों ने एक दूसरे को पहचान लिया। मौसी जी से मिलकर ताई आप्टे के जीवन का लक्ष्य निश्चित हो गया। दोनों ने मिलकर राष्ट्र सेविका समिति के काम को व्यापकता एवं एक मजबूत आधार प्रदान किया।


अगले 4-5 साल में ही महाराष्ट्र के प्रायः प्रत्येक जिले में समिति की शाखा खुल गयी। 1945 में समिति का पहला राष्ट्रीय सम्मेलन हुआ। ताई आप्टे की सादगी, संगठन क्षमता, कार्यशैली एवं वक्तृत्व कौशल को देखकर मौसी जी ने इस सम्मेलन में उन्हें प्रमुख कार्यवाहिका की जिम्मेदारी दी। जब तक शरीर में शक्ति रही, ताई आप्टे ने इसे भरपूर निभाया।


उन दिनों देश की स्थिति बहुत खतरनाक थी। कांग्रेस के नेता विभाजन के लिए मन बना चुके थे। वे जैसे भी हो सत्ता प्राप्त करना चाहते थे। देश में हर ओर मुस्लिम आतंक का नंगा खेल हो रहा था। इनकी शिकार प्रायः हिन्दू युवतियाँ ही होती थीं। देश का पश्चिमी एवं पूर्वी भाग इनसे सर्वाधिक प्रभावित था। आगे चलकर यही भाग पश्चिमी एवं पूर्वी पाकिस्तान बना।


आजादी एवं विभाजन की वेला से कुछ समय पूर्व सिन्ध के हैदराबाद नगर से एक सेविका जेठी देवानी का मार्मिक पत्र मौसी जी को मिला। वह इस कठिन परिस्थिति में उनसे सहयोग चाहती थी। वह समय बहुत खतरनाक था। महिलाओं के लिए प्रवास करना बहुत ही कठिन था; पर सेविका की पुकार पर मौसी जी चुप न रह सकीं। वे सारा कार्य ताई आप्टे को सौंपकर चल दीं। वहाँ उन्होंने सेविकाओं को अन्तिम समय तक डटे रहने और किसी भी कीमत पर अपने सतीत्व की रक्षा का सन्देश दिया।


1948 में गांधी जी की हत्या के झूठे आरोप में संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। हजारों कार्यकर्ता जेलों में ठूँस दिये गये। ऐसे में उन परिवारों में महिलाओं को धैर्य बँधाने का काम राष्ट्र सेविका समिति ने किया। 1962 में चीन के आक्रमण के समय समिति ने घर-घर जाकर पैसा एकत्र किया और उसे रक्षामन्त्री श्री चह्नाण को भंेट किया। 1965 में पाकिस्तानी आक्रमण के समय अनेक रेल स्टेशनों पर फौजी जवानों के लिए चाय एवं भोजन की व्यवस्था की।


सरस्वती ताई आप्टे इन सब कार्यों की सूत्रधार थीं। उन्होंने संगठन की लाखों सेविकाओं को यह सिखाया कि गृहस्थी के साथ भी देशसेवा कैसे की जा सकती है। 1909 में जन्मी ताई आप्टे ने सक्रिय जीवन बिताते हुए नौ मार्च, 1994 को प्रातः 4.30 बजे अन्तिम साँस ली।


#हरदिनपावन

Women's Empowerment In India

Great Example of "Women's Empowerment In India " ...
Warrior women holding double swords 

From Jain Temple , Jaisalamer back 12th century. 
#HappyWomensDay2020